UP Kisan Durghatna Yojana 2026
UP Kisan Durghatna Yojana 2026

UP Kisan Durghatna Yojana 2026: 5 लाख का मुआवजा अब ऑनलाइन! जानें कैसे करें अप्लाई

UP Kisan Durghatna Kalyan Yojana 2026: अब घर बैठे मिलेगा 5 लाख का मुआवजा, जानें पूरी प्रक्रिया!

क्या आप भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं? अक्सर देखा गया है कि दुख की घड़ी में किसान परिवारों को मुआवजे के लिए पटवारी और तहसील के अनगिनत चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन अब, उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। योगी सरकार ने ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’ (Mukhyamantri Kisan Durghatna Kalyan Yojana) को पूरी तरह से डिजिटल करने का फैसला किया है।

इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि कैसे फरवरी 2026 से यह पूरी व्यवस्था बदलने वाली है। अब आपको अपनी बीमा राशि या मुआवजे के लिए किसी बाबू के सामने गिड़गिड़ाना नहीं पड़ेगा। आप जानेंगे कि कैसे एक क्लिक पर सीधे आपके बैंक खाते में 5 लाख रुपये तक की सहायता राशि पहुंचेगी। आइए, इस क्रांतिकारी बदलाव की गहराई में उतरते हैं और समझते हैं कि इसका सीधा फायदा आपको कैसे मिलेगा।


मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का डिजिटलीकरण

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं के हित में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। फरवरी 2026 तक ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’ को 100% डिजिटल कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि आवेदन से लेकर पैसा मिलने तक की पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन होगी।

सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रणाली में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना है। पहले जहां फाइलों को एक टेबल से दूसरे टेबल तक जाने में महीनों लग जाते थे, अब वही काम आधुनिक सॉफ्टवेयर और वेब पोर्टल के जरिए कुछ ही दिनों में पूरा हो जाएगा।

UP Kisan Durghatna Yojana 2026
UP Kisan Durghatna Yojana 2026

फरवरी 2026 तक क्या बदलेगा?

राजस्व परिषद (Revenue Board) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) मिलकर एक हाई-टेक वेब पोर्टल तैयार कर रहे हैं।

  • पेपरलेस काम: अब आपको भौतिक रूप से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी।
  • रियल-टाइम ट्रैकिंग: किसान अपने मोबाइल पर देख सकेंगे कि उनकी फाइल कहां अटकी है।
  • तेज निपटान: अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी, जिससे मुआवजा मिलने में देरी नहीं होगी।

योजना के तहत मिलने वाले लाभ (Benefits of the Scheme)

यह योजना केवल एक बीमा पॉलिसी नहीं है, बल्कि किसान परिवारों के लिए एक सुरक्षा कवच है। खेती-किसानी के दौरान दुर्घटना होने पर परिवार पर जो पहाड़ टूटता है, उस समय यह आर्थिक मदद किसी संजीवनी से कम नहीं होती।

  1. 5 लाख रुपये तक का मुआवजा: यदि किसी किसान की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो सरकार 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देती है।
  2. सीधे बैंक खाते में पैसा (DBT): बिचौलियों का खेल खत्म। पैसा सीधे लाभार्थी या उसके कानूनी वारिस के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा।
  3. आंशिक दिव्यांगता पर लाभ: यदि दुर्घटना के कारण किसान आंशिक रूप से दिव्यांग होता है (जैसे एक अंग का नुकसान), तो भी उसे विकलांगता के प्रतिशत के आधार पर मुआवजा मिलता है।

अब तक के आंकड़े: किसे मिला लाभ?

सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह योजना पहले से ही हजारों परिवारों का सहारा बन चुकी है। दिसंबर 2025 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश भर में 29,394 से अधिक किसानों के आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं।

प्रमुख मंडलों में स्वीकृत आवेदनों की स्थिति:

मंडल (Zone)स्वीकृत आवेदन (Approved Applications)
लखनऊ (Lucknow)3,569
गोरखपुर (Gorakhpur)3,143
अयोध्या (Ayodhya)2,491
कानपुर (Kanpur)2,436

यह डेटा स्पष्ट करता है कि सरकार सक्रिय रूप से दावों का निपटान कर रही है, और डिजिटलीकरण के बाद इन आंकड़ों में और तेजी आने की उम्मीद है।


कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ? (Eligibility Criteria)

योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। यह जानना बेहद जरूरी है कि आप पात्र हैं या नहीं।

  • निवासी: आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • आयु सीमा: किसान की आयु 18 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • किसान की परिभाषा: यह योजना सिर्फ उन किसानों के लिए नहीं है जिनके पास अपनी जमीन है। इसमें बटाईदार (Sharecroppers) और पट्टे पर खेती करने वाले किसान भी शामिल हैं।
  • दुर्घटना का प्रकार: खेती के काम के दौरान, खेत में, रास्ते में या मशीनरी का उपयोग करते समय हुई दुर्घटनाएं इसमें कवर होती हैं। सांप का काटना, बिजली गिरना, या कुएं में गिरना जैसी दुर्घटनाएं भी शामिल हैं।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज (Required Documents)

जब प्रक्रिया फरवरी 2026 में पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी, तो आपको निम्नलिखित दस्तावेजों की स्कैन कॉपी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी:

  1. आधार कार्ड (Aadhaar Card): पहचान और पते के लिए।
  2. खतौनी/भूलेख (Land Records): यह साबित करने के लिए कि आप किसान हैं।
  3. बैंक पासबुक: जिसमें पैसा आएगा।
  4. मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate): मृत्यु की स्थिति में।
  5. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट/पंचनामा: दुर्घटना की पुष्टि के लिए।
  6. दिव्यांगता प्रमाण पत्र: यदि चोट लगी है तो CMO द्वारा जारी सर्टिफिकेट।
  7. वारिसान प्रमाण पत्र: ताकि पैसा सही व्यक्ति को मिले।

तुलनात्मक विश्लेषण: पुरानी बनाम नई व्यवस्था (Old vs New System)

नीचे दी गई तालिका से आप आसानी से समझ सकते हैं कि डिजिटलीकरण से आपके जीवन में क्या बदलाव आएगा।

सुविधापुरानी व्यवस्था (Old System)नई डिजिटल व्यवस्था (New Digital System)
आवेदन का तरीकाऑफलाइन/तहसील में जमा100% ऑनलाइन/घर बैठे
समय सीमा3-6 महीने या उससे अधिक15-30 दिन (अनुमानित)
पारदर्शिताफाइलें गुम होने का डरऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा
भागदौड़पटवारी/लेखपाल के चक्करजीरो फिजिकल विजिट
भ्रष्टाचाररिश्वत की संभावनापूरी तरह पारदर्शी (DBT)

निष्कर्ष (Conclusion)

उत्तर प्रदेश सरकार का ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’ को पूरी तरह डिजिटल करने का निर्णय वास्तव में एक क्रांतिकारी कदम है। फरवरी 2026 तक यह बदलाव लागू होने से न केवल 29,000+ लाभान्वित परिवारों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि सिस्टम से दलालों और सुस्ती का भी सफाया होगा।

किसान भाइयों, यह डिजिटल इंडिया की ताकत है जो अब आपके खेतों तक पहुंच रही है। आपको बस जागरूक रहने और अपने दस्तावेज तैयार रखने की जरूरत है। जैसे ही नया पोर्टल लॉन्च होगा, सबसे पहले आवेदन करें और अपना हक पाएं। सरकार की इस पहल का स्वागत करें और दूसरों को भी इसके बारे में बताएं।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत कितनी राशि मिलती है?

इस योजना के तहत, यदि किसी किसान की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उसे अधिकतम 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में, विकलांगता के प्रतिशत के आधार पर राशि तय की जाती है, जो 2 लाख रुपये तक हो सकती है।

Q2. क्या बटाईदार किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं?

जी हां, बिल्कुल। योगी सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाया है। अब केवल अपनी जमीन वाले किसान ही नहीं, बल्कि बटाईदार (Sharecroppers) और पट्टे पर खेती करने वाले भूमिहीन किसान भी इस योजना के पात्र हैं। बस उनके पास संबंधित प्रमाण होना चाहिए कि वे खेती करते हैं।

Q3. फरवरी 2026 के बाद आवेदन कैसे करना होगा?

फरवरी 2026 से आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगी। आपको सरकार द्वारा जारी नए वेब पोर्टल पर जाना होगा। वहां आपको ‘नया पंजीकरण’ पर क्लिक करके अपनी जानकारी भरनी होगी और दस्तावेज (जैसे आधार, खतौनी, एफआईआर कॉपी) स्कैन करके अपलोड करने होंगे। किसी भी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी।

Q4. अगर किसान की उम्र 70 साल से ज्यादा है, तो क्या लाभ मिलेगा?

दुर्भाग्यवश, नहीं। इस योजना के नियमों के अनुसार, किसान की आयु दुर्घटना के समय 18 वर्ष से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यदि आयु 70 वर्ष से अधिक है, तो वे इस विशिष्ट योजना के तहत दावे के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।

Q5. योजना का लाभ लेने के लिए दुर्घटना के कितने दिनों के भीतर आवेदन करना जरूरी है?

आमतौर पर, दुर्घटना या मृत्यु होने के 45 दिनों के भीतर आवेदन करना अनिवार्य होता है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में जिला अधिकारी (DM) की अनुमति से इस अवधि को 1 महीने तक और बढ़ाया जा सकता है। लेकिन सलाह यही दी जाती है कि जल्द से जल्द आवेदन करें।


अपना ज्ञान परखें (Interactive Knowledge Check)

Q1. मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का पूर्ण डिजिटलीकरण कब तक पूरा होगा?

A) दिसंबर 2025

B) फरवरी 2026

C) मार्च 2027

D) जनवरी 2026

सही उत्तर: B) फरवरी 2026

Q2. इस योजना के तहत मृत्यु होने पर अधिकतम कितनी सहायता राशि मिलती है?

A) 2 लाख रुपये

B) 10 लाख रुपये

C) 5 लाख रुपये

D) 1 लाख रुपये

सही उत्तर: C) 5 लाख रुपये

Q3. दिसंबर 2025 तक किस मंडल में सबसे अधिक आवेदन स्वीकृत हुए हैं?

A) कानपुर

B) अयोध्या

C) गोरखपुर

D) लखनऊ

सही उत्तर: D) लखनऊ

Q4. योजना का लाभ लेने के लिए किसान की आयु सीमा क्या है?

A) 18-60 वर्ष

B) 21-70 वर्ष

C) 18-70 वर्ष

D) 25-65 वर्ष

सही उत्तर: C) 18-70 वर्ष

Q5. इस योजना के लिए वेब पोर्टल कौन विकसित कर रहा है?

A) Google

B) राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC)

C) TCS

D) नीति आयोग

सही उत्तर: B) राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC)

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