हरियाणा के किसानों की चमकेगी किस्मत: औषधीय खेती के लिए सीएम सैनी ने बनाई नई ‘सुपर प्लान’ – अब होगी बंपर कमाई!
क्या आप पारंपरिक खेती से होने वाली सीमित आय से परेशान हैं और कुछ नया, अधिक मुनाफे वाला करने की सोच रहे हैं? अगर हाँ, तो यह खबर आपके लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई है। हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों की आय को दोगुना करने और कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए औषधीय फसलों (Medicinal Crops) की खेती को बढ़ावा देने का फैसला किया है।
इस आर्टिकल में, हम आपको विस्तार से बताएंगे कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ‘हर्बल फेड’ (Herbal Fed) को क्या सख्त निर्देश दिए हैं और कैसे यह नई योजना हरियाणा के किसानों को लखपति बना सकती है। हम जानेंगे कि कौन-कौन सी फसलों को सरकार बढ़ावा दे रही है और ‘ई-औषधि पोर्टल’ के जरिए आपको बाजार कैसे मिलेगा। इस लेख को अंत तक पढ़ें और जानें कि कैसे आप इस सुनहरे मौके का फायदा उठा सकते हैं।
सीएम सैनी का बड़ा ऐलान: हर्बल खेती से बदलेगी हरियाणा की तस्वीर
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कृषि क्षेत्र में विविधता लाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब राज्य सरकार का पूरा जोर औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने पर होगा। हाल ही में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में, सीएम सैनी ने हरियाणा राज्य हर्बल सहकारी संघ (Herbal Fed) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों के लिए एक ऐसी ठोस और व्यावहारिक कार्य योजना तैयार करें, जिससे न केवल खेती का रकबा बढ़े बल्कि किसानों की जेब में सीधा पैसा आए।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पारंपरिक फसलों में लागत अधिक और मुनाफा कम होता जा रहा है, जबकि आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ती मांग ने औषधीय पौधों को ‘कैश क्रॉप’ (Cash Crop) बना दिया है।

क्लस्टर आधारित खेती: सही जगह, सही फसल
सरकार की योजना केवल हवाई वादों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे क्षेत्रफल के अनुसार (Area Specific) फसलों का चयन करें।
इसका अर्थ यह है कि कृषि विभाग और हर्बल फेड मिलकर यह रिसर्च करेंगे कि हरियाणा के किस जिले की मिट्टी और जलवायु किस विशिष्ट औषधीय पौधे के लिए सबसे उपयुक्त है। उदाहरण के लिए, रेतीली जमीन में एलोवेरा और अश्वगंधा बेहतर हो सकते हैं, जबकि नमी वाले क्षेत्रों में तुलसी या हल्दी। इस ‘क्लस्टर मॉडल’ से यह सुनिश्चित होगा कि किसान जो फसल उगाएं, उसकी पैदावार बंपर हो और नुकसान की संभावना न के बराबर रहे।
मार्केटिंग की चिंता खत्म: सरकार देगी बाजार
किसानों की सबसे बड़ी समस्या हमेशा से ‘मार्केटिंग’ रही है। फसल उगाने के बाद उसे कहां बेचें? इसी दर्द को समझते हुए, सीएम सैनी ने आश्वासन दिया है कि औषधीय पौधे उगाने वाले किसानों को बेहतर मार्केटिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकार का लक्ष्य है कि किसान सिर्फ फसल न उगाएं, बल्कि उन्हें उनकी उपज का सही दाम भी मिले। इसके लिए सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा। जब एक ही क्षेत्र में एक जैसी फसल उगाने वाले किसानों का क्लस्टर बनेगा, तो बड़ी आयुर्वेदिक कंपनियां खुद वहां आकर फसल खरीदेंगी। इससे परिवहन का खर्च बचेगा और बिचौलियों का राज खत्म होगा।
प्रमुख औषधीय फसलें: जिन्हें सरकार देगी बढ़ावा
बैठक के दौरान कुछ विशिष्ट फसलों का जिक्र किया गया, जिनकी खेती पर सरकार का विशेष फोकस रहेगा। वर्तमान में राज्य में लगभग 4557 हेक्टेयर भूमि पर औषधीय खेती हो रही है। जिन फसलों को चिन्हित किया गया है, वे बाजार में उच्च मांग वाली हैं:
- आंवला (Amla): विटामिन सी का सबसे बड़ा स्रोत, जिसकी मांग च्यवनप्राश और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में हमेशा रहती है।
- एलोवेरा (Aloe Vera): जूस, जेल और स्किन केयर उत्पादों के लिए ‘हरा सोना’।
- स्टीविया (Stevia): शुगर-फ्री उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण इसकी खेती बेहद मुनाफे वाली है।
- मुलेठी (Mulethi): गले की दवाओं और आयुर्वेद में अत्यधिक उपयोग।
- शतावरी और अश्वगंधा (Shatavari & Ashwagandha): शक्तिवर्धक दवाओं के निर्माण में अनिवार्य, जिनकी निर्यात मांग भी बहुत ज्यादा है।
- तुलसी और हल्दी (Tulsi & Turmeric): इम्युनिटी बूस्टर के रूप में हर घर की जरूरत।
ई-औषधि पोर्टल: किसानों और खरीदारों का डिजिटल संगम
डिजिटल इंडिया की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने ‘ई-औषधि पोर्टल’ (E-Aushadhi Portal) लॉन्च किया है। यह पोर्टल इस पूरी योजना की रीढ़ साबित होगा। सीएम ने बताया कि अब तक इस पोर्टल पर 4500 से अधिक किसान अपना पंजीकरण करवा चुके हैं।
सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि 118 आयुर्वेदिक औषधि निर्माता (Manufacturers) भी इस पोर्टल से जुड़ चुके हैं। इसका सीधा फायदा यह है कि किसान को अब अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वे पोर्टल के माध्यम से सीधे कंपनियों से संपर्क कर सकते हैं। यह एक ‘बी2बी’ (Business to Business) मॉडल की तरह काम करेगा, जहां उत्पादक और खरीदार एक प्लेटफॉर्म पर होंगे।
रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आयुर्वेदिक दवाएं और औषधीय खेती केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह रोजगार सृजन (Employment Generation) का एक बड़ा जरिया हैं। जब गांवों में प्रोसेसिंग यूनिट्स लगेंगी, ग्रेडिंग और पैकेजिंग का काम शुरू होगा, तो स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
आयुर्वेद एक ऐसा क्षेत्र है जो ‘स्वस्थ वातावरण’ के साथ-साथ ‘किफायती इलाज’ भी देता है। इसलिए, सरकार खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने और व्यापार के नियमों में सुधार करने पर काम कर रही है ताकि नए उद्यमी इस क्षेत्र में आ सकें।
पारंपरिक बनाम औषधीय खेती
नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझें कि क्यों औषधीय खेती आपके लिए पारंपरिक खेती से बेहतर विकल्प हो सकती है:
| विशेषता | पारंपरिक खेती (गेहूं/धान) | औषधीय खेती (एलोवेरा/अश्वगंधा आदि) |
| बाजार मांग | स्थिर मांग, लेकिन मूल्य में उतार-चढ़ाव | तेजी से बढ़ती मांग (घरेलू और अंतरराष्ट्रीय) |
| लागत | खाद, पानी और कीटनाशकों पर भारी खर्च | कम पानी और जैविक खाद में भी संभव |
| मुनाफा | प्रति एकड़ सीमित आय | प्रति एकड़ कई गुना अधिक आय की संभावना |
| जोखिम | मौसम की मार का अधिक असर | कई औषधीय पौधे सूखे और कीटों के प्रति प्रतिरोधी होते हैं |
| सरकार की मदद | MSP पर निर्भरता | सब्सिडी, पोर्टल सुविधा और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के अवसर |
निष्कर्ष (Conclusion)
हरियाणा सरकार की यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि भविष्य स्मार्ट खेती का है। सीएम नायब सिंह सैनी द्वारा हर्बल फेड को दिए गए निर्देश और ‘क्लस्टर मॉडल’ की योजना किसानों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है। यदि आप एक किसान हैं, तो यह सही समय है कि आप पारंपरिक ढर्रे को छोड़कर औषधीय खेती की ओर कदम बढ़ाएं। ई-औषधि पोर्टल पर पंजीकरण करें और सरकार की इस मुहिम का हिस्सा बनें। याद रखें, बदलाव ही समृद्धि का पहला नियम है।
क्या आप अपनी बंजर या कम उपजाऊ जमीन से लाखों कमाना चाहते हैं? आज ही अपने नजदीकी कृषि विभाग या हर्बल फेड कार्यालय से संपर्क करें और इस योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। अपडेट रहने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें!
लोग यह भी पूछते हैं (FAQs)
1. हरियाणा सरकार की औषधीय फसल योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना है। सरकार चाहती है कि किसान गेहूं-धान के चक्र से निकलकर उच्च मूल्य वाली औषधीय फसलों (जैसे एलोवेरा, अश्वगंधा) की खेती करें, जिसके लिए उन्हें क्लस्टर आधारित सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
2. हर्बल फेड (Herbal Fed) किसानों की मदद कैसे करेगा?
हर्बल फेड किसानों के लिए एक ‘नोडल एजेंसी’ के रूप में कार्य करेगा। सीएम के निर्देशानुसार, यह संस्था किसानों को तकनीकी जानकारी देगी, उनके लिए कार्य योजना बनाएगी, और सबसे महत्वपूर्ण—’ई-औषधि पोर्टल’ के माध्यम से उनकी उपज को सीधे आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं तक पहुंचाने में मदद करेगी।
3. ई-औषधि पोर्टल पर पंजीकरण करने के क्या फायदे हैं?
ई-औषधि पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो बिचौलियों को खत्म करता है। इस पर पंजीकरण करके किसान सीधे 100 से अधिक पंजीकृत आयुर्वेदिक निर्माताओं से जुड़ सकते हैं। इससे उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिलता है और बाजार खोजने की चिंता खत्म हो जाती है। अभी तक 4500 किसान इससे जुड़ चुके हैं।
4. हरियाणा में किन औषधीय पौधों की खेती के लिए उपयुक्त वातावरण है?
हरियाणा की जलवायु और मिट्टी आंवला, एलोवेरा, स्टीविया, मुलेठी, शतावरी, तुलसी, अश्वगंधा, हरड़, बेलपत्र और हल्दी जैसी फसलों के लिए बेहद उपयुक्त है। सरकार अब जिलेवार सर्वे कर रही है ताकि किसानों को उनके क्षेत्र के हिसाब से सबसे सही फसल उगाने की सलाह दी जा सके।
5. क्या औषधीय खेती के लिए सरकार कोई सब्सिडी देती है?
हाँ, आमतौर पर राष्ट्रीय आयुष मिशन और राज्य बागवानी बोर्ड के तहत औषधीय पौधों की खेती पर सब्सिडी का प्रावधान होता है। सीएम सैनी के नए निर्देशों के तहत तैयार की जा रही कार्य योजना में किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए नई वित्तीय सहायता योजनाओं और क्लस्टर विकास अनुदान की घोषणा होने की पूरी संभावना है।
इंटरैक्टिव नॉलेज चेक (MCQ Quiz)
1. हरियाणा के मुख्यमंत्री ने किस संस्था को औषधीय खेती की कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया है?
A) हैफेड (HAFED)
B) हर्बल फेड (Herbal Fed)
C) इफको (IFFCO)
D) नाबार्ड (NABARD)
सही उत्तर: B) हर्बल फेड (Herbal Fed)
2. वर्तमान में हरियाणा में लगभग कितने हेक्टेयर भूमि पर औषधीय खेती हो रही है?
A) 2000 हेक्टेयर
B) 3500 हेक्टेयर
C) 4557 हेक्टेयर
D) 6000 हेक्टेयर
सही उत्तर: C) 4557 हेक्टेयर
3. किसानों को खरीदारों से जोड़ने के लिए कौन सा पोर्टल लॉन्च किया गया है?
A) ई-नाम (e-NAM)
B) ई-किसान (e-Kisan)
C) ई-औषधि (e-Aushadhi)
D) ई-व्यापार (e-Vyapar)
सही उत्तर: C) ई-औषधि (e-Aushadhi)
4. निम्नलिखित में से किस फसल का उल्लेख सीएम ने औषधीय खेती के लिए किया है?
A) स्टीविया (Stevia)
B) सूरजमुखी
C) कपास
D) बाजरा
सही उत्तर: A) स्टीविया (Stevia)
5. ई-औषधि पोर्टल पर कितने आयुर्वेदिक औषधि निर्माताओं ने पंजीकरण कराया है?
A) 50
B) 118
C) 200
D) 500
सही उत्तर: B) 118
